खैर इसी सरपट बाजी में...१ batch गया अंदर.....अंदर गए ५ लोगों में हमारे १ मित्र थे..श्री अनुपम जैन....जो की batch के कुछ .हंसमुख...easygoing ..लोगों में से थे...इनके चेहरे पे टेंशन शायद ही ४ साल में किसी ने देखी होगी...ये localite थे...और अपनी शान की सवारी..हीरो puch पे कॉलेज आया करते थे....3rd सेमेस्टर तक इनसे कोई विशेष दोस्ती तो नहीं हुई थी...पर इनके टेंशन फ्री attitude को जनता ने जान लिया था...खैर......पाँचों जन ने examiner और internal faculty के सामने अपनी अपनी सीटें ले लीं...और pseudo राग्गिंग चालू हो गयी....batch में १ और सज्जन गए थे ..जो की क्लास के सबसे हुर्ष्टपुष्ट और विशाल जीवों में से थे...पर स्वभाव से काफी गंभीर थे...उनसे examiner ने १ सवाल पूछा...जिसका उत्तर देने के लिए उन्होंने सोचना शुरू किया....(या शायद सोचने का नाटक शुरू किया)......खैर ...जब वहां से कोई उत्तर नहीं आया तो ..सवाल अगले छात्र पर carry फॉरवर्ड कर दिया गया.....सवाल टालने का ऐसा ही सिलसिला चल रहा था कि जैन साहब को अचानक हंसी आ गयी.....आपको सवाल का जवाब न आये..कोई बात नहीं....आप गर्दन झुका के बैठे रहे..कोई बात नहीं...पर अगर viva के उस concentration कैंप में.. आप हंस गए...किसी हंसी की बात पर भी...तो समझ लीजिये की आज आपका बड़ा दिन है.....जैन साहब को हँसता हुआ देख कर दोनों नरभक्षी जीवों ने उनकी ओर रुख किया...और उनसे जवाबदारी शुरू कर दी...उनकी हंसी पर २-४ लानतें फेंक कर ...उनसे कहा गया कि आप बताइये जवाब क्या होगा...... .अब सवाल जैन साहब के पाले में था...कहने की ज़रुरत नहीं है..उत्तर का तनिक भी आईडिया उन्हें नहीं था...और जितना उन्हें जाना है इतने समय में..उन्होंने शायद सवाल भी नहीं सुना था जब वो पहली बार उनके संगी से पुछा गया था.....जब जैन साहब के मुख से उत्तर का अवतरण नहीं हुआ तो ये तय हो गया कि आज की limelight के हकदार श्री जैन ही हैं....:) बाकी जनता राहत कि सांस ले रही थी कि अब बचे हुए समय में गुरु जन इन्ही की लंका लगायेंगे.....
जैन साहब को १ और मौका देते हुए एक्सामिनेर ने पूछा....कि चलिए कोई बात नहीं... आप ये ही बता दीजिये कि आपने प्रक्टिकल में कौन सा एक्सपेरिमेंट किया था...:)..ठंडी सांस लेते हुए...हमारे प्रिय मित्र ने अपने दिमाग पे जोर डाला...बहुत डाला....पर एक्साम्स ख़तम होने कि ख़ुशी शायद कुछ ज्यादा ही मन चुकी थी...दिमाग ने respond करने से मना कर दिया....और थोडा सकपकाते हुए अनुपम महाराज ने कहा.."सर वो तो अब याद नहीं.."...:D ......माहौल अब गरमा चुका था....दोनों गुरुजन स्तिथि का लुत्फ़ लेने के पूरे मूड में आ चुके थे.... इतने "कूल" छात्रों से सामना रोज़ रोज़ कहाँ हुआ करता है....मस्त हैं अपनी ही दुनिया में....खैर....एक्सामिनेर साहब का दिल थोडा पसीजा और उन्होंने सवाल को थोडा और आसान बनाते हुए और प्रक्टिकल में पूछे जाने वाले सवालों को १ अलग ही ऊँचाई पे ले जाते हुए पूछा....भाई..अच्छा आप ये ही बता दीजिये की आप कौनसे subject का viva देने आये हैं??.....:D ...अब भला ये भी कोई सवाल हुआ....माना प्रक्टिकल किये हुए ज्यादा दिन हो जाने के कारण हमें एक्सपेरिमेंट का नाम न याद हो....पर ये तो पता ही है की प्रक्टिकल किस subject का दिया था.....जैन साहब ने poore आत्मविश्वास के साथ इस सवाल को लपकते हुए झट से जवाब दिया....सर.... नेटवर्क सिंथेसिस एंड analysis ...:O .....इतना सुनना था कि सवाल पूछने वाले विद्वानों ने हार मान ली...और बाइज्ज़त श्री अनुपम जैन और बाकी छात्रों के झुण्ड को बाहर भेज दिया....:)...आज का उनका entertainment dose ज़रुरत से ज्यादा हो चुका था.....इतने की उन्हें आदत नहीं थी....:P ..
खैर..हमारे परम मित्र श्री अनुपम जैन प्रक्टिकल के उन बेमतलब क्लास्सेस से अब तक जीवन के कई milestones पार कर चुके हैं.....पिछले महीने की २१ तारिक को वे १ बेटे के पिता बने...:)...जीवन के इस सर्व्शेष्ठ्र achievement पर उन्हें बहुत बहुत बधाइयाँ....:)...
आज के Friday मूड के लिए ये गाना....






